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Showing posts from April, 2025

(घोर कलयुग की दस्तक) *नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते।*

समाज में कितना पतन बाकी है?  यह सुनकर दिल दहल जाता है कि कोई बेटा अपने ही माता-पिता की इतनी निर्ममता से हत्या कर सकता है? महिला ने जेठ के साथ मिलकर अपने दो वर्ष के बेटे को मरवा दिया। पत्नी ने प्रेमी सँग मिलकर मर्चेंट नेवी मे अफसर पति के टुकड़े-टुकड़े किये। पिता ने नौकर से अपने बेटे की हत्या करवायी। माँ,बाप,भाई, दोस्त,पार्टनर को मारने की खबरें आम हैं। ऐसे अपराध यह दिखाते हैं कि समाज में मानसिक संतुलन, नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों में कितनी गिरावट आ चुकी है। अपराध और नैतिक पतन की ये घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि कहीं न कहीं हमारी सामाजिक संरचना, पारिवारिक मूल्य और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर संकट है। लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि नकारात्मक घटनाएँ समाचारों में ज़्यादा दिखाई देती हैं, क्योंकि वे लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। समाज में आज भी बहुत से लोग हैं जो प्रेम, सहयोग और नैतिकता से भरे हुए हैं। हमें ज़रूरत है कि हम अच्छाई को भी उतना ही महत्त्व दें और समाज को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें। इस पतन के कारणों को समझकर समाधान निकालना ज़रूरी है—परिवारों में संवाद बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ...