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*कंचन कुंज में बिल्डिंग गिराना न्यायालय का अपमान - कलीमुल हफ़ीज़*

*अतिक्रमण हटाने के नाम पर धमकाया जा रहा है।*

प्रेस रिलीज़ 12-05-22 नई दिल्ली

कंचन कुंज में जो इमारतें गिराई गई हैं, वे गरीबों के साथ क्रूरता हैं। पुलिस और एमसीडी ने इनके निर्माण के दौरान हर छत पर मोटी-मोटी रकम ली थी। किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त नियमित कॉलोनियों में एक स्थायी संरचना को ध्वस्त करना MCD के लिए अदालत की तौहीन है।

यह विचार ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्त्तेहादुल मुस्लिमीन दिल्ली के अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़ ने कंचन कुंज में डिमोलीशन के दौरान मीडिया से बात करते हुए किये। उन्होनें कहा कि पूरी दिल्ली के लोग जानते हैं कि एमसीडी पार्षद और स्थानीय पुलिस किसी भी घर के प्रत्येक मंजिल के लिए पैसे लेते हैं, भले ही इमारत कानूनी रूप से क्यों न बनाई जा रही हो। इसके लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। यहीं इमारतें जिन्हें आज तोड़ा जा रहा है जब ये बन रहीं थीं तो इन्हीं विभागों ने बनने दिया था। लेकिन दिल्ली में अतिकर्मण को हटाने के अभियान के दौरान पुलिस और एमसीडी ने अपनी जेबें भरने के लिए उन इमारतों को नोटिस दिया जो अभियान के दायरे में नहीं आतीं और आज उन्हीं पर बुलडोजर चला दिया गया। यह सिर्फ एक आरोप नही बल्कि सच्चाई है जो कंचन कुंज के लोग कह रहे हैं। कंचन कुंज में सरकारी पानी, बिजली उपलब्ध कराया जाता है, वहां की सड़कें भी सरकारी खर्चे पर बनायी जाती हैं, वहां के लोग वोट भी देते हैं, भले ही यह एक मान्यता प्राप्त कॉलोनी नहीं है लेकिन भारत और दिल्ली सरकार के माध्यम से दिल्ली में 1739 गैर-मान्यता प्राप्त नियमित कॉलोनियां हैं। उनके सूची में कंचनकुंज का नाम 628 वें स्थान पर है। इसलिए वहां कोई निर्माण अवैध कैसे हो सकता है। कलीमुल हफ़ीज ने सवाल किया कि जब अदालत ने फैसला सुनाया है कि कोई ढांचा नहीं गिराया जाएगा तो कंचन कुंज में इमारतें क्यों गिराई गईं? ये अदालत की तौहीन नहीं है तो और क्या है? मजलिस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा मुसलमानों को परेशान और डरा रही है। यह मुसलमानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। लेकिन धैर्य की भी एक सीमा होती है। जब अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा तो धैर्य का बंधन टूट जाएगा। जिसमें भाजपा की नाव डूब जाएगी।

प्रकाशन के लिए अब्दुल ग़फ़्फ़ार सिद्दीक़ी मीडिया प्रभारी, मजलिस दिल्ली

8287421080

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