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जब रक्षक ही बन जाए भक्षक तो फिर सजा भी ज्यादा ही होगी

 


देश और देशवासियों की सुरक्षा का प्रण पुलिस-फौज एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोग लेते हैं। इसी तरह पड़ोसियों एवं परिवार के बड़ों का कर्तव्य होता है कि वे खासकर महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें लेकिन देखने में यह आता है कि महिलाएं एवं बच्चियां सर्वाधिक अपनों या परिचितों की ही हवस का शिकार बन रही हैं। दो अलग-अलग मामलों में रक्षक से भक्षक बननेवाले ऐसे ही एक कुकर्मी को कोर्ट ने उम्रवैâद जबकि एक अन्य को फांसी की सजा सुनाई है।
पहली घटना मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की है, जिसमें ५ वर्षीय मासूम से दुराचार करनेवाले कुकर्मी को अदालत ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। न्यायाधीश अनीता सिंह ने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले की सुनवाई में अभियुक्त संतोष मरकाम को दोषी ठहराए जाने पर फांसी की सजा के साथ दस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
डेरा समुदाय का एक परिवार जो गोसलपुर जिला जबलपुर का रहनेवाला है, वह कुछ दिनों से नरसिंहपुर स्टेशन के पास अपना डेरा डाले हुए है। सोमवार रात करीब १० बजे ५ साल की एक बच्ची उनके डेरे से अचानक गुम हो गई, जिसकी सूचना स्टेशन गंज थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने सर्च करने की कोशिश की परंतु कोई सुराग नहीं लगा। सुबह कुछ लोगों ने सूचना दी कि एक छोटी बच्ची बेहोशी की हालत में जेल ग्राउंड जो कि स्टेशन से कुछ दूरी पर है, वहां पड़ी हुई है। मौके पर पुलिस और परिजन पहुंचे और बच्ची की पहचान परिजनों ने की। बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जबलपुर रेफर कर दिया गया।
नरसिंहपुर में २४-२५ जून, २०१९ की दरमियानी रात को पांच साल की बच्ची से हुए दुष्कर्म के इस मामले में बाद में पुलिस ने एसएएफ बटालियन के संतोष मरकाम नामक रसोइए को गिरफ्तार किया था। संतोष मरकाम, बीजा डांडी मंडला का निवासी है। वह एक साल से एसएएफ छठवीं बटालियन में रसोइए के रूप में नरसिंहपुर में ही कार्यरत था। आरोप है कि वारदात की रात संतोष बच्ची को उसकी झोपड़ी से अगवा करके ले गया था। इसके बाद पीड़िता खून से लथपथ हालत में २५ जून की सुबह अंडर ब्रिज के पास एक पेड़ के नीचे जख्मी अवस्था में मिली थी। अभियोजन के अनुसार सशस्त्र पुलिस बल (एसएएफ) की ६ वीं बटालियन में रसोइए के पद पर पदस्थ संतोष मरकाम ने २४ जून, १९ को बस स्टैंड नरसिंहपुर के समीप रात्रि में बालिका को उठाकर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म कर फरार हो गया था। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। एसएएफ बटालियन से जुड़े संतोष के कुकर्म को कोर्ट ने संगीन अपराध माना और उसे फांसी की सजा सुनाई।
दूसरी घटना उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर जिले की है, जहां चार साल की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने अभियुक्त को आठ माह के अंदर सुनवाई पूरी करके आजीवन कारावास की सजा दी है। मामला चुनार थाना क्षेत्र के एक गांव का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक र्इंट भट्ठे पर काम करनेवाला मजदूर दुलारे बिंद ने दूसरे मजदूर की चार साल की बालिका को टाफी देने के बहाने गेहूं के खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। बालिका की स्थिति देखकर परिवार के लोग सन्न रह गये। पूछने पर बालिका और उसकी चचेरी बहन ने पूरी बात बताई। इसके बाद बालिका के पिता ने उसी दिन चुनार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दुलारे बिंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट एवं दुष्कर्म के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना कर आरोप पत्र दाखिल कर दी। मिर्जापुर की एक अदालत ने चार साल की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म के इस मामले में अभियुक्त दुलारे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही चालीस हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। जिले में आठ माह के अंदर सुनवाई पूरी करके कोर्ट ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ज्ञानेंद्र राय की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सात गवाहों एवं अन्य सबूत के आधार पर सोमवार को खुली अदालत में अभियुक्त को दोषी करार दिया। बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अभियुक्त का कृत्य अमानवीय पशुवत रहा है। ऐसे में वह किसी तरह की रियायत पाने का हकदार नहीं है।


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