भोपाल. उर्दू अकादमी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करते ही डॉ अजीज कुरैशी ने कड़े तेवर दिखाए हैं. डॉ अजीज कुरैशी ने उर्दू अकादमी से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चित्र हटवा दिए हैं. बीते शुक्रवार को ही डॉ अजीज कुरैशी ने उर्दू अकादमी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया है. उर्दू अकादमी के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने से पहले सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा रही कि डॉ अजीज कुरैशी को कांग्रेस सरकार ने उनके कद से काफी नीचे जाकर उन्हें दायित्व सौंपा है. काफी मान-मनौव्वल के बाद डॉ अजीज कुरैशी ने उर्दू अकादमी में अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया. भोपाल में 24 अप्रैल 1940 को जन्मे डॉ. अज़ीज़ कुरैशी ने भोपाल, आगरा और उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की. एमए के साथ ही कुरैशी विधि-स्नातक भी हैं. वे उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश एवं मिजोरम के राज्यपाल भी रहे हैं. डॉ. कुरैशी भारत सरकार की उर्दू विश्वविद्यालय समिति के अध्यक्ष और राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के संस्थापक उपाध्यक्ष रहे हैं. वे मप्र के शिक्षा मंत्री रहे हैं और आठवीं लोकसभा के लिये 1984 में सतना संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित होने के अलावा राज्य सरकार और भारत सरकार की अनेक समितियों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं.
बरेली में 78 वें जश्ने यौमें आजादी के मौके पर इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (इसवा) द्वारा अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।
हम करेंगे समाधान के लिए बरेली से फैज़ान नियाजी की रिपोर्ट। बरेली, 15 अगस्त 2024: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (ISWA) बरेली द्वारा एक ऐतिहासिक अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह भव्य आयोजन बरेली के प्रसिद्ध फहाम लॉन में संपन्न हुआ, जिसमें देश के कोने-कोने से शायरों और कवियों ने भाग लिया और अपने कलाम से देशभक्ति की भावना को प्रकट किया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रोताओं ने शिरकत की और कार्यक्रम की भव्यता और राष्ट्रीय एकता के संदेश की सराहना की। कार्यक्रम का शुभारंभ रात 10 बजे हुआ, जिसमें सबसे पहले ISWA के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद फ़ाज़िल और सचिव डॉ. शकील अहमद ने अतिथियों और शायरों का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिस बेग और निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. अय्यूब अंसारी भी उपस्थित थे। डॉ. फ़ाज़िल ने अपने वक्तव्य में कहा, "ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारा और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा मिलता है। हमें 15 अगस्त के इस पावन दिन को पूरे जोश और उल्लास के साथ ईद की तरह मनाना चाहिए।" कार्यक्रम की अध्यक्षत...